[Kaifi Azmi] Nayi Zameen Naya Aasman Milta Nahi | नई ज़मीन नया आसमाँ नहीं मिलता – कैफ़ी आज़मी

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कैफ़ी आज़मी की बेस्ट ग़ज़ल Nai Zameen Nay Asmaa Milta Nahi… शायरी

कैफ़ी आज़मी ग़ज़ल – नई ज़मीन नया आसमाँ नहीं मिलता

मैं ढूँडता हूँ जिसे वो जहाँ नहीं मिलता
नई ज़मीन नया आसमाँ नहीं मिलता

नई ज़मीन नया आसमाँ भी मिल जाए
नए बशर का कहीं कुछ निशाँ नहीं मिलता

वो तेग़ मिल गई जिस से हुआ है क़त्ल मिरा
किसी के हाथ का उस पर निशाँ नहीं मिलता

वो मेरा गाँव है वो मेरे गाँव के चूल्हे
कि जिन में शोले तो शोले धुआँ नहीं मिलता
जो इक ख़ुदा नहीं मिलता तो इतना मातम क्यूँ
यहाँ तो कोई मिरा हम-ज़बाँ नहीं मिलता

खड़ा हूँ कब से मैं चेहरों के एक जंगल में
तुम्हारे चेहरे का कुछ भी यहाँ नहीं मिलता

कैफ़ी आज़मी

Kaifi Azmi Ghazal – Nai Zameen Naya Asmaa Milta Nahi

Mai Dhundta Jise Wo jahan Nahi Milta
Nayi Zamin Naya Aasman Nahi Milta

Nayi Zamin Naya Aasman Bhi Mil Jaye
Nay Bashar Ka Kahin Kuchh Nishan Nahi Mila

Wo Teg Mil Gayi Jis Se Hua Hai Katl Mira
Kisi Ke Haath Ka Us Par Nishan Nahi Milta

Wo Mera Ganv Hai Wo Mere Ganv Ke Chulhe Ki
Jin Me Shole To Shole Dhuaan Nahi Milta

Jo Ik Khuda Nahi Milta To Itna Maatam Kyu
Yahan To Koi Mira Ham-Jaban Nahi Milta

Khada Hu Kab Se Chehron Ke Jangal Me
Tumhare Chehre Ka Kuchh Bhi Yaha Nahi Milta

उम्मीद करता हु आपको कैफ़ी नज़म जी की नयी जमीन नया आस्मां ग़ज़ल पसंद आयी होगी, कैफ़ी आज़मी की ग़ज़ल, शायरी को पढ़ने के लिए बने रहे हमारे साथ.

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