Kanpur UP: किसानों के कृषि कानूनों की भांति सीएए और एनआरसी भी वापस हो- अरशद मदनी

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मौलाना अरशद मदनी ने प्रधानमंत्री से कृषि कानूनों की तरह मुसलमानों के सीएए-एनआरसी कानूनों को वापस करने की बात कही। उन्होंने कहा कि किसानों का आंदोलन शुरू हुआ तो सरकार और किसानों के बीच कई दौर में बातचीत भी हुई। सीएए-एनआरसी को लेकर मुस्लिम समाज और सरकार की कोई बातचीत नहीं हुई।

पत्रिका न्यूज नेटवर्क
कानपुर. जमीयत उलमा-ए-हिंद (Jamiat-Ulama-E-Hind) के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी (Maulana Arshad Madani) ने प्रधानमंत्री से कृषि कानूनों की तरह मुसलमानों के सीएए-एनआरसी (CAA-NRC) कानूनों को वापस करने की बात कही। उन्होंने कहा कि मुसलमानों ने सीएए और एनआरसी को लेकर दिल्ली और अन्य हिस्सों में आंदोलन किया। उसी से प्रेरित होकर किसानों ने कृषि कानूनों (Agriculture Law’s) के खिलाफ आंदोलन किया। किसानों के आंदोलन के बाद केंद्र सरकार को कृषि कानून वापस लेने पड़े।

कानपुर के जाजमऊ में ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के अधिवेशन में पहुंचे मौलाना मदनी ने पत्रकार वार्ता में कहा जैसे प्रधानमंत्री ने किसानों के सम्मान का हवाला देते हुए उनके आंदोलन पर कानूनों को वापस लिया है। उसी प्रकार मुस्लिम समाज के सीएए-एनआरसी आंदोलन को ध्यान में रखते हुए इन कानूनों को भी वापस लेना चाहिए।

उन्होंने कहा कि किसानों ने एकजुट होकर कानूनों का विरोध किया और उनके जज्बातों का सम्मान करते हुए कृषि कानून वापस हुए तो मुसलमानों के जज्बातों का भी सम्मान होना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसानों का आंदोलन शुरू हुआ तो सरकार और किसानों के बीच कई दौर में बातचीत भी हुई। सीएए-एनआरसी को लेकर मुस्लिम समाज और सरकार की कोई बातचीत नहीं हुई। मुस्लिम समाज न तो इस मामले पर सरकार के पास गया और न ही सरकार समाज के आंदोलनकारियों से आकर मिली।









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