Interest rates: अभी यही नहीं… और बढ़ेगी ब्याज दरें, एक्सपर्ट ने कहा- रेपो रेट को 6-6.50% तक ले जाएगा RBI!

Interest rates: इंडिया रेटिंग्स में प्रधान अर्थशास्त्री सुनील कुमार सिन्हा ने कहा कि आरबीआई ‘तटस्थ नीतिगत दर’ हासिल करने तक रेपो दर में वृद्धि का सिलसिला जारी रख सकता है.

Hindian News
वित्त वर्ष 2022-23 में अब तक रेपो दर में 1.4 प्रतिशत की वृद्धि की जा चुकी है.

अर्थशास्त्रियों और विश्लेषकों का अनुमान है कि रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (MPC) उस समय तक दरों में बढ़ोतरी (interest rates hike in india 2022) करती रहेगी जब तक कि नीतिगत दर चालू वित्त वर्ष के आखिर तक 6-6.5 फीसदी की ‘तटस्थ दर’ तक नहीं पहुंच जाती. पीटीआई की खबर के मुताबिक,भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने शुक्रवार को खुदरा महंगाई को काबू में लाने के लिए नीतिगत दर रेपो रेट (rbi monetary policy) को 0.5 प्रतिशत बढ़ाकर 5.4 प्रतिशत कर दिया. नीतिगत दर में बढ़ोतरी का यह लगातार तीसरा मौका है. वित्त वर्ष 2022-23 में अब तक रेपो दर में 1.4 प्रतिशत की वृद्धि की जा चुकी है. इसके साथ ही प्रमुख नीतिगत दर महामारी-पूर्व से ज्यादा हो गई है. फरवरी, 2020 में रेपो दर (repo rate hike) 5.15 प्रतिशत पर थी.

तटस्थ नीतिगत दर हासिल करने तक बढेंगी दरें

खबर के मुताबिक, इंडिया रेटिंग्स में प्रधान अर्थशास्त्री सुनील कुमार सिन्हा ने कहा कि आरबीआई ‘तटस्थ नीतिगत दर’ (neutral policy rate) हासिल करने तक रेपो दर में वृद्धि का सिलसिला जारी रख सकता है.सिन्हा ने कहा कि इसके अल्पकालीन नीतिगत दर (Interest rates hike on loans) होने से उम्मीद है कि अर्थव्यवस्था दीर्घकाल में स्थिर होगी. उन्होंने कहा कि हमारा मानना है कि मौजूदा माहौल में यह तटस्थ नीतिगत दर 6-6.5 फीसदी के बीच रह सकती है.

आगे जाकर दरों में वृद्धि आंकड़ों पर निर्भर करेगी

स्विस ब्रोकरेज फर्म यूबीएस सिक्योरिटीज ने अनुमान जताया है कि वित्त वर्ष के आखिर तक एमपीसी रेपो दर (Interest rates) को और बढ़ाकर 5.75 फीसदी तक ले जा सकती है. उसने कहा कि वृद्धि और मुद्रास्फीति के परिदृश्य में अनिश्चितताएं ज्यादा बनी हुई हैं और आगे जाकर दरों में वृद्धि आंकड़ों पर निर्भर करेगी.यूबीएस सिक्योरिटीज इंडिया की मुख्य अर्थशास्त्री तन्वी गुप्ता जैन ने दरों (repo rate) में आगे और वृद्धि का अनुमान जताते हुए बढ़ते चालू खाता घाटे को इसकी वजह बताया चालू खाते का घाटा वित्त वर्ष की पहली छमाही में जीडीपी का 3.5-4 फीसदी के बीच रह सकता है.

दिसंबर तक 0.50 फीसदी की वृद्धि और होने की संभावना

बार्कलेज इंडिया में मुख्य अर्थशास्त्री राहुल बजोरिया ने कहा कि रेपो दर (repo rate hike) में दिसंबर तक 0.50 फीसदी की वृद्धि और की जा सकती है. वहीं सिंगापुर के डीबीएस में वरिष्ठ अर्थशास्त्री राधिका राव ने कहा कि वित्त वर्ष 2023-24 की शुरुआत तक मुद्रास्फीति निर्धारित लक्ष्य के ऊपर बनी रह सकती है. लिहाजा मार्च तक दर में 0.75 फीसदी की और वृद्धि देखी जा सकती है.

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